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by Acharya Chatursen (Author)
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा रचित उपन्यास 'आग और धुआं' उनके अन्य ऐतिहासिक उपन्यासों की तुलना में एक विशिष्ट और गंभीर रचना है। यह उपन्यास मुख्य रूप से सामाजिक और राजनीतिक चेतना के इर्द-गिर्द बुना गया है, जिसमें मानवीय संबंधों की जटिलताओं और समाज के अंतर्विरोधों को गहराई से उकेरा गया है।कथानक और विषय-वस्तुः इस उपन्यास का शीर्षक 'आग और धुआं' स्वयं में एक गहरा अर्थ समेटे हुए है। जहाँ 'आग' मनुष्य की दबी हुई इच्छाओं, जुनून और समाज में पनप रहे असंतोष व क्रांति का प्रतीक है, वहीं 'धुआं' उस भ्रम, अस्पष्टता और सामाजिक कुरीतियों को दर्शाता है जो सत्य को ढके रहती हैं। चतुरसेन जी ने इस कृति में प्रेम, ईर्ष्या, और महत्वाकांक्षा के साथ-साथ तत्कालीन भारतीय समाज की विडंबनाओं का चित्रण किया है।मनोवैज्ञानिक गहराईः लेखक ने पात्रों के अंतर्मन का सूक्ष्म विश्लेषण किया है।इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक व्यक्ति बाहर से शांत दिखने के बावजूद भीतर ही भीतर विचारों की 'आग' में जलता रहता है।भाषा और शैली आचार्य चतुरसेन की भाषा सदैव की तरह तत्सम प्रधान और ओजपूर्ण है। उनकी वर्णन शैली पाठक के समक्ष पूरा दृश्य जीवंत कर देती है।यथार्थवादः यह उपन्या
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